dipressionडिप्रेशन या मानसिक अवसाद

आध्यात्मिकता की दृष्टि से समझे की डिप्रेशन क्या है और कैसे इससे बचे।

आज के समय मे प्रत्येक व्यक्ति स्ट्रेस या मानसिक तनाब से गुजर रहा है और जब स्ट्रेस इमोशन या आपकी फीलिंग्स से जुड़ जाता है तो ये स्ट्रेस डिप्रेशन का कारण बनता है डिप्रेशन क्या है ?अव्यवस्थित लाइफस्टाइल और जरूरत से ज्यादा इमोशनल होना, स्ट्रेस लेना फलस्वरूप मानसिक विमारियो को जन्म देता है हलाकि की आज के इस लेख मे, मै आध्यात्मिकता की दृष्टि से मानसिक तनाव या विमारिया और उनके कारगर उपायों पर बात करुगी। कैसे आप स्ट्रेस या मानसिक तनाव अवसाद से बच सकते है

मानसिक अवसाद या डिप्रेशन
मानसिक अवसाद या डिप्रेशन

आध्यात्म क्या है

1.मानसिक अवसाद या डिप्रेशन क्या है?

दोस्तों हमारा मस्तिष्क २४ घंटे काम करता है , हम ये समझते है की जब हम रात मे सोते है तो हमारा पूरा शरीर आराम कर रहा है पर आपकी जानकारी के लिय बता दू की जब हम सो रहे होते है तब भी हमारा मष्तिष्क काम कर रहा होता है ध्यान देने की बात ये है कि हमें अपने मष्तिष्क को भी आराम देने की जरूरत है
पर हम आराम देने की बजाये जब हम अपने मष्तिष्क को काम के अलावा ,अधिक चिंता देने लगते है चिंता किसी भी प्रकार की हो सकती है जैसे की फॅमिली की चिंता , हेल्थ की चिंता , जॉब की चिंता , एक ऐसी चिंता जो आपको अंदर से प्रभावित करती है

किसी भी प्रकार की ईर्ष्या ,किसी भी प्रकार का द्वेष , और किसी भी प्रकार का मोह, जब आपको अंदर से पुरतः प्रभावित करता है तब आप मानसिक विमारियो का शिकार होते है

जब आपका तनाव आपके इमोशन से जुड़ जाता है तब आप डिप्रेशन या मानसिक अवसाद से घिर जाते है और तब आपके मष्तिष्क के अलावा आपकी बॉडी भी प्रभावित होती है क्या है डिप्रेशन ये अच्छे से समझे

आध्यात्म को समझ कर हम अपने मानसिक तनाव या मानसिक विमारियो से बच सकते है

dipressionडिप्रेशन या मानसिक अवसाद
डिप्रेशन या मानसिक अवसाद


2.मानसिक अवसाद कैसे होता है?

कुछ उदाहरण से इस बात को समझते है

Example No.1


मान लीजिये, की आपका कोई अपना फॅमिली का सदस्य जिससे आप बहुत जुड़े हो या जिसे आप बहुत रेस्पेक्ट देते हो , और जिसे आप अपना समझते हो , और किसी बजह से आपको उससे दूर कर दिया जाए या वो किसी बजह से आप से दूर हो जाये, तो इससे आपके मन मे सबसे पहले चिंता या स्ट्रेस होगा और ये स्ट्रेस जब इमोशन से जुड़ेगा यानी की जब आप उस फॅमिली मेम्बर से फिर से जुड़ना चाहते है और किसी कारन वश आप नहीं जुड़ पाए, तब इंसान स्ट्रेस मे इमोशनल होकर डिप्रेशन का शिकार होता है

Example No. 2

उदाहरण के तौर पे, जब कोई आपका अपना या पराया जिस पर आप बहुत विश्वास करते हो या जिसे आप अपना समझते हो , वो अचानक से बदल जाये या अचानक से उसका व्यवहार आपके प्रति नेगेटिव हो जाए , या जो आपके साथ रहता हो |

वो आपके साथ रहते हुए आपको इग्नोर करे, और आप से ज्यादा किसी और को महत्व दे। तब आप इसको सहन नहीं कर पाते है और आपको सबसे पहले स्ट्रेस होता है और फिर जब आपको वो व्यक्ति या लोग और ज्यादा इग्नोर करते है तब आप इसको और सहन नहीं करपाते है

और आप इमोशनली इन बातो को सोचने लगते है और बार बार इमोशनली सोचने के कारन आप डिप्रेशन का शिकार होते है।

Example No.3


कभी कभी आप बहुत सफल हो जाते है और फिर असफला से डरने लगते है या असफल होने पर आप असफलता को सहन नहीं कर पाते है और इमोशनली गहराई से सोचने लगते है बार बार सोचने के कारण , स्ट्रेस या मानसिक अवसाद होने लगता है

मानसिक विमारियो का क्या कारण है
मानसिक विमारियो का क्या कारण है

Example No.4


कभी कभी बदला लेने की प्रवति, आप पर इस प्रकार हावी हो जाती है की आप उस व्यक्ति जिससे आपको प्रॉब्लम , अपने मष्तिष्क मे बार बार उससे बदला लेने का सोचते है , और जब आप बदला लेने मे असमर्थ हो जाते है तब आप इस बात से परेशान होने के कारण , स्ट्रेस मे चले जाते है

Example No.5


आपका अगर ऐसा नेचर है की आपको किसी की बात का बहुत बुरा लगता है , किसी की बात को आप गेहराई से सोचते है , किसी की बात को आप सहन नहीं कर पाते है आपको दुसरो की बात से बहुत जल्दी प्रॉब्लम होती है किसी की उन्नति आपको परेशान करती है


दिल से आप किसी से जुड़ना चाहते है पर दिमाग से आप उनसे दूर रहते है असफल होने से डरते है

Example No.6


जिद्दी स्वाभाव के कारण जब आपके मन के हिसाब से काम न हो। आप जैसा सोचे वैसा न हो।
आपके अनुसार , या कोई आपके हिसाब से न चले
इन सभी बातो से आपको स्वयं प्रॉब्लम होती हो या आप परेशान हो जाते है , अपना मन या मष्तिष्क दूसरी जगह नहीं लगा प् रहे हो , तो आपको स्ट्रेस या मानसिक अवसाद हो सकता है

Example 7

कभी कभी अपनी बीमारी को लेकर भी स्ट्रेस लेते है और परिवार और घर से दूर होने के दर से इमोशनली दुखी रहते है और बार बार परिवार से दूर होने के डर से भी , डिप्रेशन का शिकार होते है

Example 8


जब कोई व्यक्ति किसी से एक्सपेक्टेशन करता है की वो अच्छा बेहवे करे या जैसा मै सोच रहा हु वह वैसा ही करेगा या कोई खास व्यक्ति समय पर जब हेल्प न करे तो व्यक्ति इस बात से दिल से दुखी हो जाता और बार बार यही सोच कर दुखी होता रहता है इस कारण से भी व्यक्ति मानसिक तनाव कई बार चला जाता है

मानसिक विमारियो का क्या कारण है
मानसिक विमारियो का क्या कारण है

3.मानसिक विमारियो का क्या कारण है?

अधिक स्ट्रेस या मानसिक तनाव लेना|


किसी भी व्यक्ति या वस्तु से अधिक मोह होना|किसी भी बात को जो आपको बुरी लगी उसे गेहराई से सोचना|
पास्ट को बार बार याद करके दुखी होना| जरूरत से ज्यादा किसी पर निर्भर होना|
समय पर किसी अपने की की मदद नहीं मिलना|


किसी बहुत करीबी मित्र या परिवार के सदस्य के जाने पर बार बार दुखी होना और उनके बारे मे गहराई से सोचना|
प्रेम सम्बन्ध टूटने पर दुखी होना| किसी के धोखे से दुखी करना|


असफल होने का डर या असफल होने पर ज्यादा दुखी होना|
मन मे ही बातो को रखना और दुखी होना|


छोटी छोटी बातो को मन मे रखना , और उनसे दुखी होना|
किसी से ईर्ष्या करने या किसी की उन्नति से दुखी होना|
किसी हादसे को याद करके रोना दुखी होना|
जिद्दी स्वाभाव या सेंसिटिव नेचर भी इसका कारण हो सकता है|

आपके अनुसार कोई व्यक्ति जब आपसे ठीक से व्यव्हार न करे या रिश्ता या दोस्ती ख़तम कर दे तो दुखी होना

आध्यात्म के अनुसार , मोह , माया , ईर्ष्या , लोभ , क्रोध इन सब के कारण मानसिक तनाव या मानसिक अवसाद होने की सम्भावना ज्यादा होती है

मानसिक अवसाद के लक्षण
मानसिक अवसाद के लक्षण

4.इसके क्या लक्षण है?

डिप्रेशन क्या है आइये इसके लक्षण जानते है

स्वाभाव का चीड़ चिड़ा हो जाना|
जल्दी गुस्सा आना|
खाना पीने का मन नहीं करना|
अकेले रहने का मन करता है|
अकेले मे बातो को याद करके रोना|
रात मे ठीक से नींद नहीं आना|
कानो मे किसी की आवाज सुनाई देना
सब कुछ नकारात्मक दिखाई देना
नकारात्मक विचार आना|
किसी से बात करने का मन नहीं करना|
मन घवराना , शरीर मे या जॉइंट्स या सर मे दर्द होना आदि लक्षण हो सकते है|

आध्यात्मिक स्तर पर  क्या उपाए है
आध्यात्मिक स्तर पर क्या उपाए है

5.आध्यात्मिक स्तर पर क्या उपाए है?

उपाए से पहले डिप्रेशन क्या है इसके लक्षण क्या है ये जानना अति आवश्यक है

उपाए

सबसे पहले व्यक्ति जो मानसिक वीमारी से ग्रसित है , वो किस बात से दुखी है या क्या बात उसको परेशान कर रही है ये जानने का प्रयास करे।


उस व्यक्ति को अकेला न छोड़। उसके साथ रहे और उस हिम्मत दे। और उनसे किसी और विषय पर चर्चा करे उनका मन , दूसरे विषयो पर लगाने का प्रयास करे।
किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचारो से उन्हें दूर रखे और उनसे पॉजिटिव बाते करे , उन्हें सकारात्मक दिशा दे।

यथार्त को समझे


कोई व्यक्ति जिससे आप का लगाव या आपका कोई अपना है यदि वो आपको छोड़ कर इस दुनिया से चला गया ये तो इस जीवन की सच्चाई मान कर जीवन मे आगे बड़े और नए सिरे से जीवन को शुरू करे। क्योकि जीवन और मृत्यु एक चक्र है


जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है जितनी उसकी आयु है बस उतना ही उसका जीवन है और यही एक सत्य है तो किसी की मृत्यु होने पर इस बात को समझ कर जीवन मे आगे बड़े।

किसी से ज्यादा मोह न रखे


अगर आप का कोई अपना या पराया जिसके व्यव्हार या उसके इग्नोर करने से आप दुखी है या आपको लगता है की वो आपके अपने आप के लिय नकारात्मक सोच रहे है ऐसी स्थति मे अपने रिश्ते सुधारने का प्रयास करे|

अगर नहीं सुधर रहे है आप इस स्थति को भी जीवन का सत्य मान ले।न कोई कुछ लेकर आया था न कोई कुछ लेकर जाएगा। व्यक्ति अकेला ही आया था और अकेला ही जाएगा |

तो फिर किसी व्यक्ति , और वस्तु और किसी विचार से किस बात का मोह , किस बात का द्वेष , और किस बात की ईर्ष्या।|
सकारात्मक कार्यो मे मन लगाए , जो कार्य कर रहे है उसे पूर्ण निष्ठां से करे।
ईश्वर पर विश्वास करे। ईश्वर की भक्ति करे। व्यक्ति को उसके कर्मो पर छोड़ दे और सदैव सकारात्मक सोचे।
नकारात्मक व्यक्ति और नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति से सदैव दूर रहे। क्यों की इससे नकारातमक ऊर्जा आपके चारो और फैलती है और आपको नकारात्मक सोचने पर मजबूर करती है तो ऐसे लोगो से दूर ही रहे।

असफलता से डरे नहीं


जैसे कि असफलता और सफलता एक सिक्के के दो पहलु है , सफलता आपको आपके उद्देश्य तक पहुँचाती है , और असफलता आपको नए उद्देश्यो की राह दिखाती है अतः असफल होने पर दुखी न हो और जीवन मे नए उद्देश्य बनाय। इसलिय असफलता को जीवन मे बुरा न समझे


रेइकी ऊर्जा ले , रेइकी ऊर्जा मानसिक विमारियो , इमोशनल विमारियो मे काफी आराम पहुँचाती ।आमतौर पे रेइकी ऊर्जा आपको सकारात्मक बनाती है। आपके ब्लॉकेज को समाप्त करती है


शरीर के चक्र को बैलेंस करे , शरीर के चक्र की अनियंत्रित एनर्जी को बैलेंस करे
एनर्जी हीलिंग से जल्दी ही मानसिक बीमारियों से बहार निकल सकते है।


अपने आध्यात्मिक गुरु की शरण मे जाए। उनसे मार्ग दर्शन ले , उन्हें अपनी मानसिक स्थति के बारे मे बताये, ।अपनी मानसिक स्थति , के बारे मे किसी अपने से चर्चा करेने से हिचकिचाए नहीं , बल्कि सलाह ले।
डॉक्टर से भी मानसिक स्थति की सलाह जरूर ले,योग एवम मैडिटेशन करे


अपने स्वाभाव मे परिवर्तन लाये , स्वयं को जाने , स्वयं के कार्यो पर ध्यान दे , स्वयं के कर्मो को भी समझे|आध्यात्मिक या सकारात्मक किताबे पढ़े, और कुछ दिन के लिय कही घूम आये
जीवन की सच्चाई अथवा यथार्थ को समझे।


आप स्वयं अच्छे है और यदि कोई और आपके अनुसार अच्छे व्यक्तित्व का नहीं है तो परेशान न हो और स्थति को समय पर छोड़ दे| आध्यात्मिकता को समझे|

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