OM KA ARTH?

ॐ शब्द क्या है OM OR ॐ का जाप कैसे आपके सभी कष्टों का निवारण करता है

दोस्तों आज मे आपको बहुत सरल भाषा मे , के महत्व को समझाने का प्रयास करूंगी , और आज के इस लेख हम ये जानेगे की OM ka Arth? ॐ शब्द क्या है और किस प्रकार ॐ आपके जीवन मे एक नया प्रकाश उत्पन्न करेगा , जो की आपके जीवन के अंधकार मय रूपी नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करेगा। ॐ के जाप से सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होता है
दोस्तों बहुत सारे ग्रंथो और उपनिषद मे , ॐ के अर्थ OM ka Arth का वर्णन एवम महत्व के बारे मे उल्लेख है जब भी हम किसी भी ग्रन्थ मे कोई मंत्र देखेंगे तो उस मंत्र का प्रारम्भ सदैव ॐ से होता है अर्थ ॐ के जुड़ने से उस मंत्र की शक्ति हज़ार गुना बढ़ जाती है विना ॐ के किसी भी मंत्र का उच्चारण करने से फलस्वरूप फल नहीं मिलता है तो दोस्तों आज हम इसी परम ब्रह्म रूपी ॐ की शक्ति को समझेंगे।

OM KA ARTH?
OM KA ARTH?

नकारात्मक ऊर्जा को कैसे हटाए?

जाने आध्यात्म क्या है

ॐ क्या है?

जैसा की आप जानते है कि ॐ, हिन्दू धर्म का , सर्वोत्तम शब्द है ॐ अक्षर है जिसका न अंत हो सकता है और न शुरुबात। कहते है की श्रष्टी की शुरुबात ही ॐ से हुए है ॐ हर आत्मा और शरीर मे विराज मान है

इस प्रकार ॐ उद्गम है सकारात्मक ऊर्जा का। ॐ आदि और अनंत है ॐ ईश्वर अर्थार्थ परमेश्वर है ॐ ईश्वर का सर्वोत्तम शब्द है ॐ इसी श्रष्टी की ध्वनि है इस प्रकार ॐ इस श्रष्टी मे कण कण मे विराजमान है

Jane ॐ शब्द क्या अर्थ है?

ओ३म् ईश्वर का मुख्य नाम है. योग दर्शन [१/२७,२८] में यह स्पष्ट है. यह ओ३म् शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है- अ, उ, म. प्रत्येक अक्षर ईश्वर के अलग अलग नामों को अपने में समेटे हुए है.

जैसे “अ” से व्यापक, सर्वदेशीय, और उपासना करने योग्य है.

“उ” से बुद्धिमान, सूक्ष्म, सब अच्छाइयों का मूल, और नियम करने वाला है.

“म” से अनंत, अमर, ज्ञानवान, और पालन करने वाला है. वास्तव में अनंत ईश्वर के अनगिनत नाम केवल इस ओ३म् शब्द में ही आ सकते हैं, और किसी में नहीं. अर्थार्त ॐ आदि अनंत और अमर है

ॐ का उल्लेख किस ग्रंथ मे है?

सभी ग्रंथो मई ॐ का उल्लेख है ऋग्वेद ,यजुर्वेद और उपनिषद् कठोपनिषद मे ॐ अक्षर का उल्लेख है इस प्रकार यह ईश्वर का यह मुख्य नाम है, क्योकि स्वयं ईश्वर ही यजुर्वेद के ४० वा अध्याय १७ वे मंत्र में कहते है की, “ॐ ख़म ब्रम्ह ” | इसका अर्थ है , ” ॐ मेरा मुख्य नाम है ”


ॐ की शक्ति क्या है ?


ॐ जो स्वयं ईश्वर का सर्वोत्तम नाम है , ॐ जिसके उद्गम से श्रष्टी का निर्माण हुआ है और जो इस श्रष्टी की ध्वनि है उसकी शक्ति भी अनंत है ॐ जो हर मंत्र के आगे लगाया जाता है

या सभी मंत्रो के आगे ॐ का होना दर्शाता है की ॐ परम ब्रम्ह की आलोकिक शक्ति है ॐ ही परम् ब्रह्म परमेश्वर है आदि शक्ति है|

ॐ अक्षर किन धर्मो उल्लेख है?

ॐ को बिभिन्न धर्मो मे कई प्रकार से पुकारा जाता है जैसे ॐ (ओ३म्), एक औंकार , आमीन , ओं मणिपद्मे हूं, अर्थार्थ , ॐ को सभी धर्मो मे किसी न किसी रूप मे पुकारा जाता है|

पर वास्तविक रूप मे ॐ ईश्वर का वाच्य है ॐ ईश्वर का ही रूप है

ॐ का उच्चारण कैसे करे?

ॐ जो की अनंत , परम् ब्रह्म है जो स्वयं भूत भविष्य बर्तमान है उसके नियमित जाप से , आत्मा , और शरीर शुद्ध होता है शरीर के चक्रो की ऊर्जा गतिमान रह्ती है तथा इसके जाप से कुंडलनी जागरण भी हो सकता है

अतः अपनी जीवन शैली को सकारात्मक बनाने के लिय नियमित ॐ का जाप करे।

जब हम ॐ का जाप करते है तो इसका प्रारम्भ कंठ (गले से ) से होता है अर्थार्थ की ध्वनि कंठ से प्रारम्भ होती है फिर मुख को से की ध्वनि निकलती है पर अभी भी मुख बंद नहीं होता है फिर आखरी मे की ध्वनि निकलती है जब मुँह पुरतः बंद हो जाता है

अतः ॐ का पूरा उच्चरण ओ३म् है तो जब भी आप ओ३म् का उच्चरण करे पेट तथा कंठ से अ की ध्वनि बहार की तरफ निकाले , फिर उ की ध्वनि मुख को बंद करते हुए , और मुख बंद करके म की ध्वनि को निकाले तथा जो बापस कंठ तक जाएगी। इस प्रकार ॐ का जाप करे।

किस दिशा मे ॐ का जाप करे?

पूर्व तथा उत्तर पूर्व दिशा मे ध्यान करना फलदायी होता है , क्योकि इस दिशा से सकारात्मक ऊर्जा उत्तपन्न होती है अतः ॐ का जाप पूर्व तथा उत्तर पूर्व दिशा मे मुख करके नियमित रूप से करे।

क्या ॐ का जाप करने से बीमारियों से मुक्ति मिल सकती है?

ॐ के जाप एवम प्रभाव

#सभी प्रकार की मानसिक बीमारियों से छुटकारा दिलाता है , ॐ का जाप करने से मानसिक तनाव कम होता है
# चक्रो की बंद ऊर्जा खुल जाती है और धीरे धीरे सभी अंग स्वस्थ होने लगते है
# मन एवम मष्तिष्क की एकार्गता बढ़ती है

# बुद्धि तीब्र हो जाती है , छात्रो को ॐ का जाप करना चाहिए


# घर की ऊर्जा शुद्ध एवम सकारात्मक होती है अतः घर के प्रवेश द्वार एवम पूजन स्थल पर ॐ का प्रतिक जरूर बनाये।
# किसी भी मंत्र के उच्चारण से पहले ॐ का उच्चारण जरूर करे।


# अतः ॐ अपने आप मे महा मंत्र है अतः किसी भी देवता का ध्यान करके ॐ का उच्चारण कर सकते है
# ॐ शांति का प्रतिक है अतः जिस घर अथवा स्थल पर ॐ का जाप होता है वह सुख शांति का वास होता है


# ॐ अक्षर का जाप तभी फलदायी होता है , जब आप का मन शुद्ध हो , अर्थार्थ आपके मन मे ईश्वर का वास तभी होगा जब आपका मन शुद्ध होग। लोभ, मोह, माया, ईर्ष्या द्वेष , क्रोध , काम का जब आपके मन मे निवास नहीं होगा , और जब आपका मन पुरतः शुद्ध होगा , तब ईश्वर या ॐ का निवास आपके मन मे होगा


# अध्यात्म मे तरक्की के लिय ॐ का जाप करे
# गर्भवती स्त्री को भी ॐ का जाप करना चाहिए जिससे गर्भ मे पल रहे शिशु मे सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है
#ॐ का ध्यान आपकी औरा को मजबूत करता है

कैसे ॐ शरीर मे सकारात्मक ऊर्जा का उद्गम करता है

जैसा की मैंने कहा ॐ ईश्वर का ही एक स्वरुप है , ॐ आलोकिक शक्ति है जहां भी ॐ का जाप होगा वहा से ही सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होने लगेगी , अतः जब शरीर की सारे चक्रो को जागृत करने के लिय ॐ का जाप करेंगे , तब आपके चक्रो मे सकारात्मक ऊर्जा का उद्गम होगा , और आपकी (औरा) औरा बहुत पावरफुल हो जाएगी जो आपके शरीर की रक्षा करेगी।


अतः स्वयं को एवम सभी को शुद्ध मन से ॐ का जाप एवम ध्यान करना चाहिए।

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